पति यह हो या वह ,
पत्नी यह हो या वह ,
कुछ फरक नहीं पड़ता ,
विवाह रुपी पिंजडा नहीं बदलता ।
मेरे काव्य संग्रह " भँवर " से
Sunday, April 20, 2008
Monday, March 31, 2008
Sunday, March 30, 2008
अपना-बेगाना
अपने तो अपने होते हैं,
वे जान से प्यारे होते हैं,
इस बदलती दुनिया में,
वे क्यों बेगाने होते हैं।
वे जान से प्यारे होते हैं,
इस बदलती दुनिया में,
वे क्यों बेगाने होते हैं।
Wednesday, March 26, 2008
सही बात
नवजात शिशु से सीख,
भेद-भाव मिटाना,
हँसते हुए रोते हुए,
हर एक को गले लगाना।
छोटी-छोटी बातों पर,
यूं ही खुश हो जाना,
एक क्षण रूठ कर,
दूसरे पल मान जाना।
भेद-भाव मिटाना,
हँसते हुए रोते हुए,
हर एक को गले लगाना।
छोटी-छोटी बातों पर,
यूं ही खुश हो जाना,
एक क्षण रूठ कर,
दूसरे पल मान जाना।
Monday, March 17, 2008
देखो
देखो,स्वयं को अवश्य देखो,
दूसरों की नज़रों से देखो,
ख़ुद , खुदा नहीं हो, देखो,
खुदा, कोई और है देखो।
दूसरों की नज़रों से देखो,
ख़ुद , खुदा नहीं हो, देखो,
खुदा, कोई और है देखो।
Thursday, February 14, 2008
मौन शक्ति
प्यार का नगमा,
गाता जा सुनाता जा,
उनके दिल को,
हर्षाता जा।
खुशी भी इसमें,
चैन भी इसमें,
प्यार की बीन,
बजाता जा।
कर्म भी यही,
धर्म भी यही,
सब कुछ यही,
समझाता जा।
प्यार ही प्यार,
ज़िंदगी का सार,
स्वयं पहचान ले,
औरों को बतलाता जा।
जीवन उद्धार,
कर पालनहार,
प्यार शक्ति,
दर्षाता जा।
गाता जा सुनाता जा,
उनके दिल को,
हर्षाता जा।
खुशी भी इसमें,
चैन भी इसमें,
प्यार की बीन,
बजाता जा।
कर्म भी यही,
धर्म भी यही,
सब कुछ यही,
समझाता जा।
प्यार ही प्यार,
ज़िंदगी का सार,
स्वयं पहचान ले,
औरों को बतलाता जा।
जीवन उद्धार,
कर पालनहार,
प्यार शक्ति,
दर्षाता जा।
Wednesday, February 13, 2008
पानी
पानी पानी में क्या हे फर्क,
कहीं मीठा कहीं खारा होता,
मनुष्य भी हैं अलग-अलग,
एक सीधा, दूसरा टेढा होता।
आकाश भी एक जैसा कहाँ,
घने मेघा इधर, नीला वहाँ,
रंग बिरंगी दुनिया में,
नहीं कुछ एक जैसा यहाँ।
है हवाओं में भी अंतर,
कहीं लू, कहीं शीत लहर,
कभी खुशी, कभी गम का मन्ज़र,
भिन्न है हर एक का सफर।
हम एक हैं समझा नहीं,
है दुर्दशा का कारण यही,
कब जान पायेगा मालूम नहीं,
राहत मिलेगी या नहीं।
मानसिक संतुलन खोने से होता यही,
सब कुछ होते हुए भी, कुछ होता नहीं,
पानी, पानी में अंतर यही,
कहीं रुक गया, कहीं रुकता नहीं।
कहीं मीठा कहीं खारा होता,
मनुष्य भी हैं अलग-अलग,
एक सीधा, दूसरा टेढा होता।
आकाश भी एक जैसा कहाँ,
घने मेघा इधर, नीला वहाँ,
रंग बिरंगी दुनिया में,
नहीं कुछ एक जैसा यहाँ।
है हवाओं में भी अंतर,
कहीं लू, कहीं शीत लहर,
कभी खुशी, कभी गम का मन्ज़र,
भिन्न है हर एक का सफर।
हम एक हैं समझा नहीं,
है दुर्दशा का कारण यही,
कब जान पायेगा मालूम नहीं,
राहत मिलेगी या नहीं।
मानसिक संतुलन खोने से होता यही,
सब कुछ होते हुए भी, कुछ होता नहीं,
पानी, पानी में अंतर यही,
कहीं रुक गया, कहीं रुकता नहीं।
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