नेकी कर कुवें में डाल,
यह थी कल की बात ,
आज संसार के ,
बिगडे हैं हालत ।
नेकी ना करें ,
ख़बर दें छाप ,
झूठ बोल कर ,
पदमश्री हो प्राप्त ।
वर्षा हो ,
कोई नहीं करता प्रयास ,
दो बूंद जल चढ़ाकर,
करें स्वर्ग की आस .
ढोंगी का नाश ,
अक्सर होता है,
दूसरे की कबर खोदने वाला ,
स्वयं उसमें गिरता है।
भगवान् से डर,
उल जलूल काम ना कर,
अच्छा नहीं कर सकता ,
बुरा तो ना कर ।
Sunday, July 27, 2008
Thursday, June 5, 2008
खुशनसीब
बहुत बार ऐसा लगा,
जीवन की गाड़ी,
पटरी से,
उतर जायेगी।
खुदा का शुक्र है,
कर्मों का फल है,
शायद नसीब अच्छा है,
ऐसा नहीं हुआ।
मुसीबतें आईं ,
बार-बार आई,
ऐसा लगा,
मिट जाऊँगा।
जैसे-तैसे,
स्वयं को संभाला,
मेहनत की,
भँवर से निकाला।
दुःख आयेंगे,
घुटने न टेको,
धैर्य एवं संयम से,
कट जायेंगे।
यह आसान नहीं,
अत्यंत कठिन है,
नेक नियत से,
सम्भव है।
जीवन की गाड़ी,
पटरी से,
उतर जायेगी।
खुदा का शुक्र है,
कर्मों का फल है,
शायद नसीब अच्छा है,
ऐसा नहीं हुआ।
मुसीबतें आईं ,
बार-बार आई,
ऐसा लगा,
मिट जाऊँगा।
जैसे-तैसे,
स्वयं को संभाला,
मेहनत की,
भँवर से निकाला।
दुःख आयेंगे,
घुटने न टेको,
धैर्य एवं संयम से,
कट जायेंगे।
यह आसान नहीं,
अत्यंत कठिन है,
नेक नियत से,
सम्भव है।
Thursday, May 29, 2008
Sunday, May 4, 2008
आह
नेताओं को गरीबों के,
दर्द का अहसास है,
अधिकतर छीन लिया,
शेष खून की प्यास है।
देख कर इनका बहशीपन,
मन विचलित हो उठता है,
मारूं तो किस मौत मारूं,
हर दंड कम लगता है.
दर्द का अहसास है,
अधिकतर छीन लिया,
शेष खून की प्यास है।
देख कर इनका बहशीपन,
मन विचलित हो उठता है,
मारूं तो किस मौत मारूं,
हर दंड कम लगता है.
Sunday, April 20, 2008
व्याख्याता
पति यह हो या वह ,
पत्नी यह हो या वह ,
कुछ फरक नहीं पड़ता ,
विवाह रुपी पिंजडा नहीं बदलता ।
मेरे काव्य संग्रह " भँवर " से
पत्नी यह हो या वह ,
कुछ फरक नहीं पड़ता ,
विवाह रुपी पिंजडा नहीं बदलता ।
मेरे काव्य संग्रह " भँवर " से
Monday, March 31, 2008
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