Sunday, July 27, 2008

दिखावा

नेकी कर कुवें में डाल,
यह थी कल की बात ,
आज संसार के ,
बिगडे हैं हालत ।

नेकी ना करें ,
ख़बर दें छाप ,
झूठ बोल कर ,
पदमश्री हो प्राप्त ।

वर्षा हो ,
कोई नहीं करता प्रयास ,
दो बूंद जल चढ़ाकर,
करें स्वर्ग की आस .

ढोंगी का नाश ,
अक्सर होता है,
दूसरे की कबर खोदने वाला ,
स्वयं उसमें गिरता है।

भगवान् से डर,
उल जलूल काम ना कर,
अच्छा नहीं कर सकता ,
बुरा तो ना कर ।

Thursday, June 5, 2008

खुशनसीब

बहुत बार ऐसा लगा,
जीवन की गाड़ी,
पटरी से,
उतर जायेगी।

खुदा का शुक्र है,
कर्मों का फल है,
शायद नसीब अच्छा है,
ऐसा नहीं हुआ।

मुसीबतें आईं ,
बार-बार आई,
ऐसा लगा,
मिट जाऊँगा।

जैसे-तैसे,
स्वयं को संभाला,
मेहनत की,
भँवर से निकाला।

दुःख आयेंगे,
घुटने न टेको,
धैर्य एवं संयम से,
कट जायेंगे।

यह आसान नहीं,
अत्यंत कठिन है,
नेक नियत से,
सम्भव है।

Thursday, May 29, 2008

महत्ता

हवा पकड़ सकते नहीं,
लहरें गिन सकते नहीं,
महत्ता प्यार की,
समझ सकते नहीं।

मेरे काव्य संग्रह 'भँवर 'से

दो दिन

लहरों की भांति ,
उतार-चडाव ,
जीवन नहीं ,
शांति पड़ाव।

----मेरे काव्य संग्रह 'भँवर ' से

Sunday, May 4, 2008

आह

नेताओं को गरीबों के,
दर्द का अहसास है,
अधिकतर छीन लिया,
शेष खून की प्यास है।

देख कर इनका बहशीपन,
मन विचलित हो उठता है,
मारूं तो किस मौत मारूं,
हर दंड कम लगता है.

Sunday, April 20, 2008

व्याख्याता

पति यह हो या वह ,
पत्नी यह हो या वह ,
कुछ फरक नहीं पड़ता ,
विवाह रुपी पिंजडा नहीं बदलता ।

मेरे काव्य संग्रह " भँवर " से

Monday, March 31, 2008

नया दौर

पशुता के इस दौर में,
नंगेपन की होड़ में,
सेवा-भावना लुप्त हो गई,
मानवता ख़त्म हो गई।